दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र के कई खेतों में फसल की बढ़वार प्रभावित होने की शिकायत, कृषि विशेषज्ञों से जांच की मांग
उदय साहू/डगनिया/अंडा। दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों धान की फसल में पीलापन दिखाई देने से किसान चिंतित हैं। क्षेत्र के कई खेतों में धान की ऊपरी पत्तियां पीली पड़ने के साथ फसल की बढ़वार प्रभावित होने की स्थिति नजर आ रही है। किसानों के अनुसार, फसल में खैरा पीलापन जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, वहीं कुछ किसान इसे टुंग्रो वायरस से जोड़कर भी आशंका जता रहे हैं।
इसके साथ ही धान की फसल में माहू के प्रकोप की शिकायत भी सामने आ रही है। फसल को बचाने के लिए किसान बाजार में उपलब्ध अलग-अलग कृषि दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं। हालांकि, कई किसानों का कहना है कि दवाइयों के उपयोग के बाद भी खेतों में पीलापन और कीट प्रकोप पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रहा है।
दवाइयों पर खर्च के बाद भी राहत नहीं मिलने की चिंता
किसानों के सामने अब दोहरी चिंता है। एक ओर फसल में बीमारी या पोषक तत्वों की कमी से जुड़े लक्षण और कीट प्रकोप दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर फसल बचाने के लिए लगातार दवाइयों पर खर्च करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि उपचार के बावजूद समस्या बनी रहती है तो उत्पादन प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान भी बढ़ सकता है।
किसानों के मुताबिक, बाजार में उपलब्ध कृषि उत्पादों के प्रभावी होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन खेत में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से वे असमंजस में हैं। उनका कहना है कि बिना सही बीमारी या कीट की पहचान के अलग-अलग दवाइयों का प्रयोग करने से खर्च बढ़ रहा है और समस्या का समाधान भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
खेतों का निरीक्षण कर किसानों को दी जाए सही जानकारी
किसानों ने कृषि विभाग और कृषि विशेषज्ञों से क्षेत्र के प्रभावित खेतों का निरीक्षण कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि धान की पत्तियों में पीलापन कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है, इसलिए वास्तविक समस्या की पहचान के बाद ही उपचार की सलाह मिलनी चाहिए।
यदि समय रहते खेतों की जांच कर बीमारी, पोषक तत्वों की कमी अथवा कीट प्रकोप की सही पहचान कर किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उपचार की जानकारी दी जाए, तो फसल को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। अब किसानों की नजर कृषि विभाग की जांच और विशेषज्ञों की सलाह पर है।



