शिक्षक सम्मान समारोह में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, प्रमाण पत्र से लेकर चेक तक में सामने आईं खामियां

Darshan Balod
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उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रमाण पत्र नहीं मिलने से नाराजगी, 7 हजार की जगह 5 हजार का चेक और प्रशस्ति पत्र में महिला के नाम के आगे ‘श्री’ लिखे जाने की शिकायत

बालोद, 18 सितंबर। जिला मुख्यालय के आमापारा स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में आयोजित जिला स्तरीय मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण एवं शिक्षक सम्मान समारोह में जहां जिलेभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया, वहीं कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ शिक्षकों में नाराजगी भी देखने को मिली। सम्मान समारोह के दौरान प्रमाण पत्र नहीं मिलने के साथ ही चेक की राशि और प्रशस्ति पत्र में नाम लिखने को लेकर भी त्रुटियां सामने आने की बात शिक्षकों ने कही।

जिला जनसंपर्क कार्यालय की संशोधित जानकारी के अनुसार समारोह में जिले के 2 राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक, 2 राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक, 3 ज्ञानदीप पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, पांचों विकासखंडों से चयनित 15 शिक्षक दूत तथा संकुल स्तर पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले 173 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

सम्मान मिला, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं

कुछ उत्कृष्ट शिक्षकों ने बताया कि सम्मानित किए जाने के दौरान उन्हें कोई प्रमाण पत्र या प्रशस्ति पत्र नहीं दिया गया। उनके अनुसार उन्हें केवल नारियल और पेन देकर सम्मानित किया गया, जबकि अन्य शिक्षकों को मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र एवं प्रमाण पत्र जैसी सम्मान सामग्री दी गई।

शिक्षकों का कहना है कि सम्मान में मिलने वाली सामग्री से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी पुरस्कार या सम्मान का प्रमाण स्वरूप प्रमाण पत्र मिलना जरूरी है। भविष्य में अपनी उपलब्धि का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए यही दस्तावेज उपयोगी होता है। एक शिक्षक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि विभाग के पास बजट की कमी थी तो ऐसी व्यवस्था पहले से स्पष्ट होनी चाहिए थी, शिक्षकों के सम्मान में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

7 हजार की जगह 5 हजार का चेक देने की शिकायत

कार्यक्रम के दौरान चेक वितरण को लेकर भी शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठे। कुछ शिक्षकों के अनुसार जिन सम्मानित शिक्षकों को 7 हजार रुपये की राशि दी जानी थी, उनके चेक में 5 हजार रुपये अंकित कर दिए गए थे। राशि में अंतर सामने आने के बाद कुछ शिक्षकों ने सम्मान के बाद चेक वापस भी कर दिए।

शिक्षकों ने कहा कि सम्मान समारोह में चेक जारी करने से पहले राशि और संबंधित शिक्षक का विवरण जांच लेना चाहिए था। राशि में इस तरह की त्रुटि से सम्मानित शिक्षकों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

प्रशस्ति पत्र में महिला के नाम के आगे ‘श्री’!

इसी दौरान एक प्रशस्ति पत्र में महिला शिक्षक के नाम के आगे ‘श्री’ लिखे जाने की बात भी सामने आई। शिक्षकों के अनुसार मंच से सम्मान के दौरान नाम का उच्चारण भी उसी संबोधन के साथ किया गया। इस त्रुटि को लेकर भी कार्यक्रम में चर्चा होती रही और शिक्षकों ने प्रमाण पत्र तैयार करने से पहले नाम एवं संबोधन की जांच किए जाने की आवश्यकता बताई।

शिक्षकों ने कहा—सम्मान में व्यवस्था भी गरिमापूर्ण हो

कुछ शिक्षकों का कहना है कि सम्मान का उद्देश्य शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य को पहचान देना है। ऐसे में सम्मान की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, राशि और नाम में किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों ने कहा कि उन्हें सम्मान में जो भी मिला, उसका वे सम्मान करते हैं, लेकिन प्रमाण पत्र, चेक और प्रशस्ति पत्र में शुद्धता एवं समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

समारोह में मौजूद शिक्षकों के बीच इन व्यवस्थागत कमियों को लेकर चर्चा और असंतोष का माहौल रहा। वहीं, प्रमाण पत्र वितरण, चेक की राशि में अंतर और प्रशस्ति पत्र में संबोधन की त्रुटि को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से अलग से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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