40 वर्षों से लोकगायन, गीत लेखन और संगीत के क्षेत्र में सक्रिय; करीब 250 गीतों से बनाई अलग पहचान, बालोद जिले के लिए गौरव का क्षण
डौंडीलोहारा। छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ द्वारा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में बालोद जिले के वनांचल ग्राम फिरतुटोला (नंगुटोला) निवासी प्रसिद्ध लोक कलाकार विष्णु कोठारी ‘मीत’ को कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘लोक कला गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। छोटे से गांव से निकलकर लोककला के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले कलाकार को मिले इस सम्मान से बालोद जिले में हर्ष का माहौल है।
विष्णु कोठारी ‘मीत’ पिछले 40 वर्षों से लोक गायक, गीतकार और संगीतकार के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोककला एवं फिल्म जगत में अपने गीत लेखन के माध्यम से खास पहचान बनाई है। उनकी रचनाएं विभिन्न छत्तीसगढ़ी फिल्मों में शामिल रही हैं।
उनके प्रमुख कार्यों में ‘मोर मन के मीत’, ‘बेनाम बादशाह’, ‘डार्लिंग प्यार झुकता नहीं’, ‘जीरो बनही हीरो’, ‘बीए फाइनल’, ‘एमए प्रीवियस’, ‘चंदामामा’, ‘धनेश के आराधना’, ‘टीना टप्पर’, ‘आंय बांय सांय’, ‘मोर फलानिन’ और ‘ब्यूटी पार्लर वाली बहु’ सहित अनेक फिल्मों के लिए गीत लेखन शामिल है। उन्होंने अब तक लगभग 250 गीतों का लेखन कर अपनी अलग पहचान बनाई है।
गांव की प्रतिभा का सम्मान, जिले के लिए गौरव
वनांचल के एक छोटे से गांव से निकलकर चार दशक तक लोककला की साधना करने वाले विष्णु कोठारी ‘मीत’ का सम्मान क्षेत्र की उभरती प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा और लगन के लिए संसाधनों से अधिक जरूरी निरंतर साधना और अपनी कला के प्रति समर्पण है।
सम्मान प्राप्त होने पर विष्णु कोठारी ‘मीत’ ने मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना का लाभ मिलने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष गुरुदास मानिकपुरी सहित संगठन के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
लोककला के क्षेत्र में चार दशक से सक्रिय विष्णु कोठारी ‘मीत’ को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि बालोद जिले की लोक सांस्कृतिक विरासत और वनांचल की प्रतिभा के लिए भी गौरव का विषय है।

