बालोद। जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर मधुकांत यादव सहित जोगेंद्र योगी, जयराम निर्मलकर, मंत्री राम भंडारी एवं मोतीलाल चंद्राकर ने शासन-प्रशासन के समक्ष विभिन्न मांगें रखी हैं। इन मांगों में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) जुंगेरा के लिए आवंटित भूमि पर संस्थागत व्यवस्था विकसित करने, शिक्षक प्रशिक्षण शुरू कराने तथा रावघाट क्षेत्र की रेल परियोजना को गति देने के साथ विशेष ट्रेनों के संचालन की मांग प्रमुख है।
पांच एकड़ भूमि पर डायट विकसित करने की मांग
मांगकर्ताओं के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2017 में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) जुंगेरा, जिला बालोद के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। इसके लिए बजट प्रस्ताव भी जिला शिक्षा विभाग बालोद द्वारा भेजे जाने की जानकारी दी गई है। उनका कहना है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में डायट की सुविधा विकसित होने से प्रतिवर्ष द्विवार्षिक पाठ्यक्रम के तहत लगभग 200-200 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। इससे प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने के अवसर मिलेंगे।
मांगकर्ताओं ने कहा कि प्राथमिक शालाओं में पिछले करीब पांच वर्षों से शिक्षकों की कमी की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में शिक्षक प्रशिक्षण की स्थानीय व्यवस्था विकसित करना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उन्होंने मोदी की गारंटी 2023 में 57 हजार शिक्षकों तथा एक लाख कर्मचारियों की भर्ती के उल्लेख का हवाला देते हुए कहा कि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने से गांव से लेकर प्रदेश तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जगदलपुर-दुर्ग रेल लाइन को डबल करने की मांग
मांगकर्ताओं ने बस्तर और छत्तीसगढ़ के रेल संपर्क को बेहतर बनाने के लिए जगदलपुर से दुर्ग तक रेल लाइन के दोहरीकरण की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि रेल मार्ग के विस्तार एवं दोहरीकरण से हैदराबाद, महाराष्ट्र और ओडिशा की ओर आवागमन की दूरी और समय कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही रावघाट क्षेत्र से उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के परिवहन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी, जिससे छत्तीसगढ़ और देश को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
तीजा-पोरा पर तीन दिन स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग
छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व तीजा-पोरा को देखते हुए तीन दिनों के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन की मांग भी की गई है। मांगकर्ताओं ने दुर्ग, नागपुर और बिलासपुर सहित प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली स्पेशल ट्रेन चलाने का आग्रह किया है, ताकि पर्व के दौरान लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके।
प्रधानमंत्री से रेल मंत्री तक भेजे जा चुके पत्र
मांगकर्ताओं ने बताया कि इन विषयों को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय नगरीय निकाय मंत्री, दुर्ग सांसद विजय बघेल, कांकेर, राजनांदगांव, रायपुर एवं जगदलपुर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों तथा रेल मंत्री और प्रधानमंत्री के समक्ष लगातार मांग रखी जा रही है। जिलाधीश बालोद के माध्यम से भी पत्र प्रेषित किए गए हैं। उनका कहना है कि संसद सत्र के दौरान पिछले करीब 10 वर्षों से दिल्ली जाकर संबंधित विभागों को आवेदन दिए जाते रहे हैं।
इसके अलावा वित्त मंत्री ओपी चौधरी, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा तथा रायगढ़ के सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह को भी पत्र प्रेषित कर मांगों से अवगत कराया गया है।
मांगकर्ताओं ने डबल इंजन की सरकार से उम्मीद जताई है कि बालोद सहित आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों की शिक्षा और परिवहन से जुड़ी इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

