“CM हेल्पलाइन में अलग खसरे के दस्तावेज से शिकायत निराकृत बताने का आरोप”

Darshan Balod
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CM हेल्पलाइन में अलग खसरे के दस्तावेज से शिकायत निराकृत बताने का आरोप

रघुनन्दन साहू ने L2 स्तर के निराकरण पर उठाए सवाल, कहा—‘प्रकरण प्रक्रियाधीन’ है तो शिकायत निराकृत कैसे?

बालोद, 11 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज भूमि संबंधी शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया को लेकर ग्राम सांकरा निवासी रघुनन्दन गंगबोईर साहू ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी शिकायत में उठाए गए मूल तथ्यों और मांगों की स्वतंत्र जांच किए बिना ही पूर्व प्रतिवेदन के आधार पर शिकायत को निराकृत बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि L2 स्तर पर शिकायत के निराकरण के समर्थन में ऐसा दस्तावेज अपलोड किया गया, जिसमें अलग खसरा नंबर और अलग भूमि से संबंधित विवरण दिखाई देता है।

शिकायतकर्ता के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज उनकी शिकायत क्रमांक WP260800161035 का संबंध ग्राम सांकरा की संयुक्त कृषि भूमि से है। इसमें खसरा क्रमांक 193/7, 195/1 एवं 203, कुल रकबा लगभग 2.61 हेक्टेयर, सहित अन्य भूमि के बंटवारे, सूचना एवं सुनवाई, सीमांकन तथा भूमि के भौतिक स्वरूप में कथित परिवर्तन से जुड़े बिंदुओं की जांच की मांग की गई थी।

L1 से L2 तक पहुंची शिकायत

शिकायतकर्ता के अनुसार मूल शिकायत CC260700069051 दिनांक 03 जुलाई 2026 को दर्ज की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत 22 अगस्त 2026 को दर्ज हुई। रिकॉर्ड के अनुसार 25 अगस्त को L1 स्तर पर तहसीलदार ने संबंधित भूमि के संबंध में पूर्व से प्रकरण क्रमांक 202306240700041 दर्ज होने और नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का उल्लेख किया।

शिकायतकर्ता की असहमति के बाद मामला L2 स्तर पर पहुंचा। 03 सितंबर 2026 को अनुविभागीय अधिकारी की ओर से समाधान के रूप में उल्लेख किया गया कि आवेदित विषय के संबंध में हल्का पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त कर विधिवत न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया गया है और नियमानुसार कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद शिकायत की स्थिति ‘निराकृत (फीडबैक लंबित)’ दर्ज किए जाने पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं।

अलग खसरे के दस्तावेज को लेकर आपत्ति

रघुनन्दन साहू का सबसे बड़ा सवाल L2 स्तर पर अपलोड किए गए “Document 86 (3).pdf” को लेकर है। उनके अनुसार उपलब्ध स्क्रीनशॉट में इस दस्तावेज में खसरा नंबर 913/7, रकबा 0.667 हेक्टेयर तथा अन्य व्यक्तियों के नाम और ग्राम बालोद स्थित भूमि से संबंधित विवरण दिखाई देता है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी शिकायत का मूल विषय ग्राम सांकरा स्थित खसरा क्रमांक 193/7, 195/1 एवं 203 से जुड़ा है। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि 913/7 और 0.667 हेक्टेयर वाली भूमि से संबंधित दस्तावेज उनके प्रकरण का हिस्सा है तो उसका संबंध स्पष्ट किया जाए और यदि वह अलग प्रकरण से संबंधित है तो उसे शिकायत के निराकरण का आधार बनाए जाने की प्रक्रिया की जांच की जाए।

‘प्रकरण प्रक्रियाधीन’ तो शिकायत निराकृत कैसे?

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार 22 अगस्त को शिकायत L1 को भेजी गई, 25 अगस्त को L1 स्तर पर निराकृत दर्शाई गई, 26 अगस्त को असहमति के बाद L2 को भेजी गई और 3 सितंबर को L2 स्तर पर निराकृत (फीडबैक लंबित) दर्ज हुई। इसके बाद 10 सितंबर को असहमति के कारण मामला L3 स्तर पर पहुंचा, जहां इसे प्रक्रियाधीन बताया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जब संबंधित राजस्व प्रकरण में कार्रवाई स्वयं ‘प्रक्रियाधीन’ बताई गई है, तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की मूल शिकायत को किस आधार पर निराकृत माना गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

प्रत्येक आरोप पर बिंदुवार जवाब की मांग

रघुनन्दन साहू ने मांग की है कि उनकी शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की स्वतंत्र जांच की जाए। उन्होंने संबंधित राजस्व अभिलेख, पटवारी प्रतिवेदन, बंटवारा आदेश, सीमांकन दस्तावेज, पंचनामा एवं अन्य रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग की है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि क्या सभी संबंधित पक्षकारों को विधिवत सूचना और सुनवाई का अवसर मिला, क्या वास्तविक सीमांकन किया गया तथा भूमि के स्वरूप में कथित परिवर्तन की जांच किस स्तर पर की गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।

L3 स्तर की कार्रवाई से उम्मीद

शिकायतकर्ता ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से बदनाम करना नहीं है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी जनशिकायत व्यवस्था में शिकायत का वास्तविक और तथ्यात्मक निराकरण होना चाहिए, केवल पोर्टल पर शिकायत की स्थिति बदलना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने मांग की है कि L2 स्तर पर किए गए निराकरण की समीक्षा, अपलोड किए गए दस्तावेज की प्रासंगिकता एवं सत्यापन और मूल शिकायत से संबंधित अभिलेखों का मिलान कराया जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर तथ्यात्मक रूप से गलत अथवा अपूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है तो जिम्मेदारी निर्धारित की जाए तथा शिकायतकर्ता को प्रत्येक बिंदु पर कारणयुक्त एवं बिंदुवार जवाब उपलब्ध कराया जाए।

शिकायतकर्ता ने कहा कि अब मामला L3 स्तर पर प्रक्रियाधीन है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार पूर्व प्रतिवेदन को दोहराने के बजाय मूल शिकायत, राजस्व अभिलेख और अपलोड किए गए दस्तावेज का आपस में मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

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