कर्रेगांव, खामतराई और करकूटोला क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास; उत्कृष्ट सेवाओं के लिए शिक्षकों को मिला सम्मान
बालोद। वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाकर बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे शिक्षक समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। सीमित संसाधनों और विभिन्न चुनौतियों के बीच ये शिक्षक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ पालकों को जागरूक कर विद्यालयों में शिक्षा का माहौल मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शासकीय हाई स्कूल कर्रेगांव के प्राचार्य एवं संकुल प्रभारी सुखराम ठाकुर ने विद्यालय की घटती दर्ज संख्या को बढ़ाने के लिए पालकों से संपर्क कर उन्हें बच्चों की शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। कम दर्ज संख्या के कारण विद्यालय के बंद होने की आशंका थी, लेकिन उनके प्रयासों से विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली। इस वर्ष विद्यालय का दसवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 95 प्रतिशत रहा। उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया गया है। संकुल प्रभारी के रूप में भी वे शिक्षकों को मार्गदर्शन दे रहे हैं।
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कर्रेगांव के प्रधान पाठक जगन्नाथ कोरेटीया भी वनांचल में शिक्षा सेवा दे रहे हैं। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय खामतराई के प्रधान पाठक एवं संकुल प्रभारी राजकुमार सिंदरामे और शासकीय माध्यमिक शाला खामतराई के शिक्षक कामदेव पटेल विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए प्रयासरत हैं। दोनों शिक्षकों को कुछ दिन पहले विधायक कुंवर सिंह निषाद ने सम्मानित किया।
इसी क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक विद्यालय करकूटोला के प्रधान पाठक ओंकार प्रसाद सोनसारवा भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वे संकुल केंद्र कर्रेगांव और खामतराई में संकुल समन्वयक की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन, शैक्षणिक गतिविधियों के समन्वय और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय हैं। उनके योगदान को देखते हुए दर्शन बालोद द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय गुरु गौरव सम्मान समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया।
शासकीय प्राथमिक शाला भूताटोला की प्रधान पाठक शमा अली खान के मार्गदर्शन में पिछले वर्ष एक विद्यार्थी का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ, जो विद्यालय के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है।
इन शिक्षकों का समर्पण बताता है कि निरंतर मेहनत, बेहतर मार्गदर्शन और पालकों के सहयोग से वनांचल में भी शिक्षा की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

