मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, काली और उमा के स्वरूपों से मिला आत्मबल व संस्कारों का संदेश; निःशुल्क राजयोग शिविर 21 अक्टूबर से
बालोद। नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, आत्मज्ञान भवन, आमापारा, बालोद में पांच देवियों मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, मां काली एवं मां उमा की चैतन्य झांकी का भव्य उद्घाटन किया गया। झांकी के माध्यम से श्रद्धालुओं को देवी स्वरूपों से जुड़े आध्यात्मिक रहस्यों को समझने और उनके दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बहन भारती कुलदीप, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डॉ. प्रीति अग्रवाल, महिला रोग विशेषज्ञ, आशा पटेल, पार्षद वार्ड क्रमांक 10 एवं बीके विजयलक्ष्मी दीदी, संचालिका ब्रह्माकुमारीज बालोद के करकमलों से हुआ।
केवल पूजा नहीं, देवी गुणों को जीवन में उतारने का संदेश
कार्यक्रम में अतिथियों ने नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है। यह नारी शक्ति, पवित्रता, आत्मबल, सदाचार और सकारात्मक जीवन मूल्यों को जागृत करने का अवसर भी है।
देवी स्वरूपों के माध्यम से बुराइयों का त्याग कर अच्छाइयों को अपनाने, विचारों को श्रेष्ठ बनाने तथा समाज में शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की स्थापना का संदेश दिया गया।
पांच देवियों के आध्यात्मिक रहस्यों से कराया परिचित
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी नेहा दीदी ने पांचों देवियों के आध्यात्मिक रहस्यों को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं की महिमा केवल उनकी पूजा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके स्वरूपों में समाहित दिव्य गुणों को समझकर अपने जीवन में धारण करना ही सच्ची साधना है।
भारती कुलदीप बोलीं—शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
भारती कुलदीप ने कहा कि देवियों की झांकी के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलता है कि जीवन में साधना की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन संस्कारों की कमी चिंता का विषय है। इसी कारण सामाजिक अपराधों में वृद्धि देखने को मिलती है।
उन्होंने बालोद में मेडिटेशन के माध्यम से शिक्षा और संस्कार की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
डॉ. प्रीति अग्रवाल—हर स्त्री में दैवी शक्ति विद्यमान
डॉ. प्रीति अग्रवाल ने कहा कि हर स्त्री के भीतर दैवी शक्तियां विद्यमान हैं। राजयोग के माध्यम से इन शक्तियों को जागृत किया जा सकता है और व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मबल का विकास कर सकता है।
राजयोग से स्वयं पर नियंत्रण का संदेश
बीके विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि झांकी में पांचों कर्मेन्द्रियों को चंचल घोड़ों के समान दर्शाया गया है, जो अनियंत्रित होकर अलग-अलग दिशाओं में भागती रहती हैं। राजयोग के अभ्यास के माध्यम से स्वयं पर नियंत्रण स्थापित कर व्यक्ति अपने भीतर दिव्य ऊर्जा का अनुभव कर सकता है।
उन्होंने बताया कि राजयोग की शिक्षा ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्रों में निःशुल्क दी जाती है। इसके माध्यम से मन को परमात्मा के दिव्य स्वरूप में एकाग्र करने और सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण कर मन को शक्तिशाली बनाने का अभ्यास कराया जाता है।
21 अक्टूबर से पांच दिवसीय निःशुल्क राजयोग शिविर
गौरतलब है कि नवरात्रि के पश्चात 21 अक्टूबर से पांच दिवसीय राजयोग शिविर प्रारंभ होगा। इसमें कोई भी भाई-बहन अपनी सुविधा के अनुसार प्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा शाम 5 बजे से रात 8 बजे के बीच एक घंटे का समय चुनकर शिविर का लाभ ले सकेंगे।
चैतन्य देवियों की झांकी के माध्यम से जहां श्रद्धालुओं को नवरात्रि के आध्यात्मिक पक्ष को समझने का अवसर मिला, वहीं आगामी राजयोग शिविर आत्मिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक जीवनशैली की दिशा में लोगों के लिए उपयोगी अवसर बन सकता है।


